एक सुकून तेरे आँचल में ढूंढने निकला था
वो चाहत थी तेरी, जो तेरी ओर निकला था
कुछ दूर आये तो देखा
तू कहीं और तेरा दामन कही और
तेरी खोज में निकला, तो पाया
तेरी राह कोई और तेरी आरजू कोई और
तू तो नहीं थी लेकिन तेरी चाहत वही थी
मैं तो वही था लेकिंन वो मुद्दत नहीं था
थक के वही लौट गए जहां से
एक ठहराव तेरे दामन में ढूंढने निकला था
नज़र आओ तो आँखों में बसा लूँ
करीब आओ तो कह दूँ जो कहना था
माफ़ करना अब न हो सकेगा , क्यूँ कि
ढूंढ़ने मैं वही अल्फ़ाज़ निकला था

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